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Tuesday, 2 August 2016

श्री गीताजी भजनावली-4 बार बार तेरी गीता सुनु मैँ

बार बार तेरी गीता सुनु मैँ प्यारे कृष्ण मुरार सुन लो प्रभु जी दिल की ये ही हैं पुकार..

    1.कई जन्मों से आया हू मैँ भटक भटक अब मेरा मन ना जाये कही पे अटक अटक
अब नहीं तरसू और सदा मैँ रहू तेरे चरणार - सुन लो प्रभु

    2.सारा जीवन करता रहा मैँ अगर मगर ,विषयो के दर पे मैँ भटका डगर डगर,
अब तो नजरे कर्म हो जाये ओ मेरे बक्शनहार-सुनलो प्रभु

3.हाथ जोड़ विनती करूं मैँ बार बार -गुनाह मेरे अब मालिक कर दो तार तार ,
राह,तेरी पे चलता रहूं मैँ ,नाम तेरा उच्चार -सुनलो प्रभु

4.जीव तेरे यहाँ रो रहे हैं बार बार ,भव सागर में डूबा हूँ उर वार ना पार
ज्ञान नैया अब ले आओ जल्दी ओ मेरे तारन हार -सुन लो प्रभु

5.भक्त हुआ तेरी गीता पे सोहनी सरकार वांग परवाना फिदा हुआ तेरे दरबार
ठुकरा दो या प्यार  करो गिर पड़ा हू तेरे दरबार -सुनलो प्रभु    

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