Search This Blog

Tuesday, 2 August 2016

श्री गीताजी भजनावली-6 गीता अपनाओ जी ये दुआ हैं मेरी

गीता अपनाओ जी ये दुआ हैं मेरी आयु सफल करो ये सदा हैं मेरी

  •  जब तलक तुम रहो हरि भजन करो भूलने दो ये दुनिया ये ही लग्न करो ,गीता कहती यही जो रहनुमा हैं मेरी 
  •  उम्र भर मैँ ये गीता सुनाता रहू ,सोये भाग्य तेरे मैँ जगता रहूं ,दुःख निवारण की गीता एक दवा हैं मेरी
  • खाना पीना ही जिंदगी का काम ना हो बंदगी बंदगी सुबह शाम ही हो ,मान लो मान लो ये इल्तज़ा हैं मेरी
  • शुक्र हैं उस प्रभु का जो वाणी हैं दी ज्ञान नैया की  रवानी हैं दी ,मन की रोगों की गीता एक शमा हैं मेरी
  • लो सुनो वो प्रभु अब बुला ही रहे ज्ञान नैया पे हमको बिठा ही रहे ,सच पूछो तो गीता मल्लाह  हैं मेरी  

No comments:

Post a Comment