श्री गीताजी भजनावली-6 गीता अपनाओ जी ये दुआ हैं मेरी

गीता अपनाओ जी
ये दुआ हैं मेरी आयु सफल करो ये सदा हैं मेरी
- जब तलक तुम रहो
हरि भजन करो भूलने दो ये दुनिया ये ही लग्न करो ,गीता कहती यही जो रहनुमा हैं मेरी
- उम्र भर मैँ ये
गीता सुनाता रहू ,सोये भाग्य तेरे
मैँ जगता रहूं ,दुःख निवारण की
गीता एक दवा हैं मेरी
- खाना पीना ही
जिंदगी का काम ना हो बंदगी बंदगी सुबह शाम ही हो ,मान लो मान लो ये इल्तज़ा हैं मेरी
- शुक्र हैं उस
प्रभु का जो वाणी हैं दी ज्ञान नैया की
रवानी हैं दी ,मन की रोगों की
गीता एक शमा हैं मेरी
- लो सुनो वो
प्रभु अब बुला ही रहे ज्ञान नैया पे हमको बिठा ही रहे ,सच पूछो तो गीता मल्लाह
हैं मेरी
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